Jamshedpur: समाज में ऐसे लोग भी हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के अपना पूरा जीवन दूसरों का भविष्य संवारने में लगा देते हैं। Divine Academy के शिक्षक सह लेखक विक्रम प्रसाद ‘कुशवाहा’ ऐसे ही व्यक्तित्व हैं। उन्होंने करीब 25 वर्षों तक विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा देकर उनके जीवन को नई दिशा दी। उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले लगभग 40 विद्यार्थी इंजीनियर बने, जबकि कई अन्य विद्यार्थियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता हासिल कर अपनी पहचान बनाई।

Divine Academy Coaching
85 वर्ष से अधिक उम्र के हो चुके विक्रम प्रसाद ‘कुशवाहा’ अब उम्र संबंधी कारणों से पहले की तरह शिक्षण कार्य करने में असमर्थ हैं। इसके बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने शिक्षा को कमाई का साधन बनाने के बजाय समाजसेवा का माध्यम बनाया और वर्षों तक विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया।
शिक्षण कार्य के साथ-साथ विक्रम प्रसाद ‘कुशवाहा’ ने साहित्य के क्षेत्र में भी योगदान दिया है। उनकी लिखी पुस्तक ‘हिन्दी शब्द ज्ञानेश्वरी माता कैकेयी’ उनके साहित्यिक कार्यों का परिचय देती है।
Divine Academy में चलाया स्वच्छता अभियान
शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में निःस्वार्थ योगदान देने वाले लोगों को पहचान दिलाने के उद्देश्य से Natural Smile Foundation की टीम Divine Academy पहुंची। यहां टीम ने स्वच्छता अभियान चलाया और शिक्षक विक्रम प्रसाद ‘कुशवाहा’ के योगदान को समाज के सामने लाने की पहल की।
फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य केवल परिसर की साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन लोगों के कार्यों को भी सामने लाना रहा, जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी अपेक्षा के समाज और विद्यार्थियों के हित में काम किया है।
विद्यार्थियों की सफलता ही शिक्षक की असली कमाई
विक्रम प्रसाद ‘कुशवाहा’ की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि एक शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि उसके विद्यार्थियों की सफलता होती है। उनके मार्गदर्शन में पढ़कर इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले विद्यार्थी उनकी वर्षों की मेहनत और समर्पण का प्रमाण हैं।
इस अवसर पर Natural Smile Foundation के संस्थापक राज गुप्ता, प्रवीण कुमार और नीलम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं, श्रुति ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विशेष मेहनत, समर्पण और सक्रियता का परिचय दिया। उनके प्रयासों की सराहना की गई।
फाउंडेशन की इस पहल के माध्यम से समाज के उन गुमनाम सेवा-साधकों को सम्मान और पहचान दिलाने का संदेश दिया गया, जिनका योगदान अक्सर चर्चा से दूर रह जाता है, लेकिन जिनके कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं।
















